श्लोक का अर्थ: यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता


यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता अगर आप धार्मिक कार्यक्रमों में रुचि रखते हैं तो आपने यह श्लोक कहीं ना कहीं जरूर सुना होगा लेकिन क्या आपको इसका मतलब पता है? अगर आपको इसका मतलब नहीं पता तो इस पोस्ट को पूरा पढ़े हैं क्योंकि यहां हम आपको इसके बारे में पूरी जानकारी देंगे ।

“यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता” श्लोक का अर्थ क्या है?

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः ।।

इस श्लोक का अर्थ है: जिस जगह पर नारी की पूजा होती है अर्थात स्त्रियों का सम्मान किया जाता है, वहां पर देवता निवास करते हैं अर्थात उस कुल के सभी कार्य संपन्न हो जाते है।

परंतु जिस जगह पर नारी का सम्मान नही होता और स्त्रियों का अपमान किया जाता है, वहाँ किये गए सभी कार्य, यज्ञ, अनुष्ठान आदि निष्फल हो जाते है और उस कुल का कोई भी कार्य संपन्न नही होता।

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